
एक जनपद एक व्यंजन योजना (ODOC) के अंतर्गत चिन्हित व्यंजनों के समग्र विकास हेतु वित्त पोषण में सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से ओ0डी0ओ0सी0 व्यंजनों की विभिन्न विधाओं में कार्यरत अथवा कार्य करने के इच्छुक व्यक्तियों के लिए निम्नांकित मार्गदर्शक सिद्धान्तों के अधीन वित्त पोषण हेतु सहायता योजना संचालित की जानी है। योजना का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि जनपद के विशिष्ट व्यंजनों का मूल्य संवर्धन, उत्पादन क्षमता वृद्धि, गुणवत्ता सुधार एवं राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता में सतत अभिवृद्धि हो सके। योजनान्तर्गत वित्त पोषण हेतु मुख्य रूप से निम्नलिखित प्राविधान किया जाता है:-
आवेदक की न्यूनतम आयु 18 वर्ष होनी चाहिए।
न्यूनतम शैक्षिक योग्यता जरूरी नहीं है।
आवेदक ई-पोर्टल के माध्यम से आवेदन करेगा।
आवेदन का चयन स्कोर कार्ड के आधार पर किया जाएगा।
| Project Cost | Margin Money Subsidy |
|---|---|
| ₹25.00 लाख तक | परियोजना लागत का 25% या ₹6.25 लाख, जो कम हो |
| ₹25.00 लाख से अधिक और ₹50.00 लाख तक | परियोजना लागत का 20% या ₹6.25 लाख, जो अधिक हो |
| ₹50.00 लाख से अधिक और ₹150.00 लाख तक | परियोजना लागत का 10% या ₹10 लाख, जो अधिक हो |
| ₹150.00 लाख से अधिक | परियोजना लागत का 10% या ₹50 लाख, जो कम हो |
जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केंद्र (DIEPC) द्वारा चयनित आवेदन पत्र को बैंक शाखा को प्रेषित किया जाएगा (07 दिनों के भीतर)
बैंक शाखा द्वारा आवेदन पर निर्णय लिया जाएगा | ऋण स्वीकृति (Sanction), अस्वीकृति (Reject), पुनर्विचार हेतु वापसी (Revert) (01 माह के भीतर)
ऋण स्वीकृत होने की स्थिति में लाभार्थी को प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा (न्यूनतम 07 दिन, पॉलिटेक्निक/आईटीआई/RSETI/EDI आदि संस्थानों के माध्यम से)
मार्जिन मनी योजना एक वित्तीय सहायता योजना है, जिसके अंतर्गत लाभार्थियों को अपना उद्यम स्थापित करने या उसका विस्तार करने के लिए सब्सिडी प्रदान की जाती है।
इस योजना का उद्देश्य प्रारंभिक निवेश का वित्तीय बोझ कम करके स्वरोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा देना है।
छोटे व्यवसाय या उद्यम शुरू करने या विस्तार करने के इच्छुक व्यक्ति, जो योजना के दिशा-निर्देशों को पूरा करते हैं, आवेदन कर सकते हैं।
हाँ, यह योजना नए उद्यमियों के साथ-साथ अपने व्यवसाय का विस्तार करने वाले मौजूदा उद्यमों के लिए भी लागू है।
मार्जिन मनी से तात्पर्य उस सब्सिडी से है जो सरकार द्वारा परियोजना लागत के एक हिस्से को वहन करने के लिए दी जाती है, जिससे आवेदक का स्वयं का वित्तीय योगदान कम हो जाता है।
इस योजना में परियोजना लागत से जुड़ी सब्सिडी प्रदान की जाती है, जिससे लाभार्थी का ऋण बोझ कम होता है।
नहीं, मार्जिन मनी ऋण नहीं है; यह एक सब्सिडी या वित्तीय सहायता है जो योजना के नियमों के अनुसार दी जाती है।
हाँ, लाभार्थी को शेष राशि स्वयं के योगदान या बैंक ऋण के माध्यम से जुटानी होती है।
हाँ, इस योजना के तहत मार्जिन मनी के रूप में वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान किए जाते हैं, जो उद्यमिता को बढ़ावा देते हैं।
हाँ, बैंक शेष परियोजना लागत के वित्तपोषण और आवेदन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
आवेदकों को आयु, निवास और पात्र व्यवसाय गतिविधियों से संबंधित मानदंडों को पूरा करना आवश्यक है।
हाँ, केवल वही व्यवसाय पात्र होंगे जो योजना के दिशा-निर्देशों के अंतर्गत अनुमत हैं।
आवेदक निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार, आमतौर पर पोर्टल या संबंधित विभाग के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।
आवेदकों को पहचान प्रमाण, पता प्रमाण, परियोजना रिपोर्ट और बैंक से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने होते हैं।
सब्सिडी स्वीकृति प्रक्रिया के अनुसार जारी की जाती है और सामान्यतः बैंक वित्तपोषण से जुड़ी होती है।
यह योजना प्रारंभिक वित्तीय बोझ को कम करती है, उद्यमिता को बढ़ावा देती है और व्यवसाय विकास में सहायता करती है।
लाभ योजना के नियमों और सीमाओं के अनुसार प्राप्त किए जा सकते हैं; निर्धारित सीमा से अधिक दोहराव की अनुमति नहीं है।
स्वीकृति के बाद परियोजना का वित्तपोषण किया जाता है और मार्जिन मनी सहायता योजना के अनुसार प्रदान की जाती है।
हाँ, संबंधित प्राधिकरणों द्वारा योजना के कार्यान्वयन और धन के उपयोग की निगरानी की जाती है।
नियमों का उल्लंघन होने पर लाभ वापस लिए जा सकते हैं या वसूली की जा सकती है, जैसा कि योजना में निर्धारित है।
ओडीओसी नागरिक पोर्टल के माध्यम से सीधे अपनी शिकायत या पूछताछ दर्ज करें और जिला अधिकारियों से समाधान प्राप्त करें।
प्रथम किस्त वितरण के उपरांत बैंक द्वारा प्रथम किस्त का ऋण वितरण किया जाएगा (15 दिनों के भीतर)
प्रथम किस्त वितरण के उपरांत बैंक द्वारा मार्जिन मनी (सब्सिडी) का दावा पोर्टल के माध्यम से किया जाएगा (अगले 07 दिनों के भीतर)
दावा प्राप्त होने पर DIEPC द्वारा सब्सिडी राशि बैंक को हस्तांतरित की जाएगी (07 दिनों के भीतर)
सब्सिडी राशि को बैंक द्वारा TDR (टर्म डिपॉजिट रसीद) के रूप में रखा जाएगा
लाभार्थी की इकाई के 02 वर्षों तक सफल संचालन के उपरांत संयुक्त सत्यापन किया जाएगा (DIEPC के उपायुक्त एवं संबंधित शाखा प्रबंधक द्वारा)
सत्यापन उपरांत निर्णय, यदि इकाई योजना अनुसार संचालित पाई जाती है → सब्सिडी राशि को बैंक ऋण में समायोजित किया जाएगा, यदि उल्लंघन पाया जाता है → सब्सिडी राशि संबंधित विभाग को वापस की जाएगी