शामली पश्चिमी उत्तर प्रदेश का एक प्रमुख कृषि आधारित और ऐतिहासिक जिला है, जिसकी स्थापना वर्ष 2011 में हुई थी। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) का हिस्सा होने के कारण इसका औद्योगिक और वाणिज्यिक महत्व भी काफी है। यह जिला अपनी उपजाऊ भूमि, बड़े पैमाने पर गन्ने की खेती और गुड़ व चीनी उद्योगों के लिए पूरे भारत में प्रसिद्ध है। महाभारत काल से जुड़े पौराणिक स्थल और 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी स्मृतियां शामली की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को समृद्ध करती हैं। वन डिस्ट्रिक्ट वन कुज़ीन कार्यक्रम के तहत शामली जिले के लिए पलंग तोड़ मिठाई, गुड़ आधारित उत्पाद और चाट का चयन किया गया है।

शामली की टिक्की चाट अपने कुरकुरेपन और मसालेदार, खट्टे-चटपटे स्वाद के लिए जानी जाती है। टिक्की को लोहे के तवे पर शुद्ध देसी घी में धीमी आंच पर लंबे समय तक सेंका जाता है। इसकी प्रसिद्ध किस्में खास तौर पर हनुमान धाम रोड और सदर बाजार में मिलती हैं।

शामली की पलंग तोड़ मिठाई अपने खास स्वाद के लिए प्रसिद्ध है, जिसके कारण इसे यह यादगार और अनोखा नाम मिला। इसे दूध को घंटों तक धीमी आंच पर पकाकर गाढ़ा और कैरेमल जैसा होने तक तैयार किया जाता है। इसके बाद इसमें चीनी, घी और सूखे मेवे मिलाए जाते हैं, जिससे यह मिठाई सघन और स्वाद वाली बनती है। इसका गहरा दूधिया स्वाद और मुंह में घुल जाने वाली बनावट पलंग तोड़ मिठाई को शामली की एक विशिष्ट मिठाई बनाते हैं।

शामली गन्ना उत्पादक क्षेत्र का एक प्रमुख हिस्सा है। यहां मसाला गुड़, शक्कर, तिल की चिक्की और गन्ने की खीर प्राकृतिक और पारंपरिक विधियों से बिना किसी रसायन के तैयार की जाती हैं। कैराना कस्बा, कांधला रोड पर स्थित गन्ना प्रसंस्करण इकाइयां और शामली की अनाज मंडी इन शुद्ध उत्पादों के लिए खास तौर पर प्रसिद्ध हैं।