संत कबीर नगर पूर्वी उत्तर प्रदेश का एक महत्वपूर्ण जिला है, जो महान संत कबीर दास की स्मृतियों से जुड़ा हुआ है। यह जिला बुनाई, कृषि और मगहर में स्थित संत कबीर दास की समाधि के लिए जाना जाता है। वन डिस्ट्रिक्ट वन कुज़ीन कार्यक्रम के तहत संत कबीर नगर जिले के लिए खोया आधारित मिठाई, समोसा और पेड़ा का चयन किया गया है।

संत कबीर नगर का प्रसिद्ध समोसा अपने खस्ता आवरण, मसालेदार आलू की भरावन और बेहतरीन स्वाद के लिए पूरे देश में जाना जाता है। मैदा, आलू, हरी मटर (मौसमी), शुद्ध मसालों और शुद्ध तेल से तैयार यह लोकप्रिय व्यंजन सही अनुपात, उचित तापमान और अनुभवी हलवाइयों की कारीगरी का उत्कृष्ट उदाहरण है। धीमी आंच पर सुनहरा और कुरकुरा होने तक तला गया समोसा बाहर से खस्ता और अंदर से स्वादिष्ट मसालों से भरपूर होता है, जो हर उम्र के लोगों का पसंदीदा नाश्ता है। ODOC कार्यक्रम के अंतर्गत कानपुर के स्थानीय हलवाइयों, खाद्य उद्यमियों और पारंपरिक खाद्य प्रतिष्ठानों को ब्रांडिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग के माध्यम से सशक्त बनाने का प्रयास किए जा रहे है, ताकि कानपुर के इस प्रतिष्ठित स्वाद को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक नई पहचान मिल सके। आइए, संत कबीर नगर के समोसे का स्वाद लें और 'लोकल से ग्लोबल' की इस यात्रा में स्थानीय उद्यमियों का साथ दें।

संत कबीर नगर का पेड़ा दूध से तैयार की जाने वाली एक पारंपरिक मिठाई है। इसे खोये को चीनी के साथ धीमी आंच पर पकाकर तैयार किया जाता है, जिससे इसकी बनावट सघन और मुलायम हो जाती है। इसमें देसी घी के साथ इलायची या केसर जैसे सुगंधित पदार्थ मिलाए जाते हैं, जो इसके स्वाद और सुगंध को और खास बनाते हैं। अपनी सघन बनावट, हल्की मिठास और दूधिया स्वाद के लिए प्रसिद्ध यह पेड़ा संत कबीर नगर की एक खास स्थानीय मिठाई है।

संत कबीर नगर की पारंपरिक खोया आधारित मिठाइयों में खोया पेड़ा और कलाकंद खास तौर पर लोकप्रिय हैं। खलीलाबाद और आसपास के क्षेत्रों में शुद्ध दूध से तैयार किए गए खोये से बनने वाली ये मिठाइयां अपने स्थानीय स्वाद और गुणवत्ता के लिए जानी जाती हैं। इनमें प्रोटीन और कैल्शियम होने के कारण इन्हें ऊर्जा से भरपूर भी माना जाता है।