संभल अपनी समृद्ध कारीगरी, पारंपरिक शिल्प कौशल और निर्यात-उन्मुख हस्तशिल्प उद्योगों के लिए जाना जाता है, जो पीढ़ियों से फलता-फूलता रहा है। जिले ने कुशल हस्तशिल्प तकनीकों और कलात्मक उत्पादन के माध्यम से एक विशिष्ट पहचान विकसित की है, जो विरासत-आधारित विनिर्माण गतिविधियों में लगे एक बड़े कारीगर समुदाय का समर्थन करती है।

संभल की गजक क्षेत्र की सदियों पुरानी सर्दियों की परंपरा से जुड़ी है, जिसमें तिल और गुड़ का उपयोग किया जाता है। भुने हुए तिल को सावधानीपूर्वक कूटा जाता है और पिघले हुए गुड़ के साथ मिलाकर हाथ से बेलते हुए इसकी बारीक और कुरकुरी परतें तैयार की जाती हैं। अपनी खास सुगंध, कुरकुरी बनावट और संतुलित मिठास के कारण गजक संभल की एक लोकप्रिय खाद्य विशेषता है।

संभल और आसपास के मुरादाबाद क्षेत्र में सेवइयां मुख्य रूप से ईद और अन्य त्योहारों के दौरान पारंपरिक मिठाई के रूप में तैयार की जाती हैं और परोसी जाती हैं।

संभल की सोन पापड़ी अपनी बारीक, परतों और मुंह में घुल जाने वाली बनावट के लिए खास तौर पर जानी जाती है। इसकी खास परतें तैयार करने के लिए पकी हुई चीनी की चाशनी को भुने हुए बेसन, मैदा और घी के साथ मिलाकर बार-बार खींचा जाता है। यह प्रक्रिया विशेष कौशल और सावधानी की मांग करती है। पारंपरिक कारीगरी से तैयार होने वाली सोन पापड़ी संभल की एक लोकप्रिय मिठाई है।