प्रतापगढ़ को पूरे भारत में “आंवला राजधानी” के नाम से जाना जाता है, क्योंकि यहां देश में आंवले का सबसे अधिक उत्पादन और प्रसंस्करण होता है। सई नदी के किनारे स्थित यह जिला पूर्ववर्ती अवध क्षेत्र के राजाओं और तालुकेदारों से अपने गहरे ऐतिहासिक संबंध के लिए भी जाना जाता है। वन डिस्ट्रिक्ट वन कुज़ीन कार्यक्रम के तहत प्रतापगढ़ जिले के लिए आंवला और गुलाब जामुन का चयन किया गया है।

प्रतापगढ़ शहर, कुंडा, लालगंज, पट्टी और बाबागंज में तैयार किए जाने वाले गुलाब जामुन अपनी मुलायम बनावट और चाशनी से भरपूर स्वाद के लिए जाने जाते हैं। खोये से तैयार किए जाने वाले इन गुलाब जामुनों को धीमी आंच पर तला जाता है और फिर चीनी की चाशनी में डुबोया जाता है। त्योहारों, विवाह समारोहों और विशेष अवसरों के दौरान इनकी मांग खास तौर पर अधिक रहती है।

प्रतापगढ़ लंबे समय से आंवले की खेती के एक प्रमुख केंद्र के रूप में जाना जाता है। यहां की अनुकूल मिट्टी और जलवायु आंवले की खेती के लिए उपयुक्त है। ताजे आंवले से पारंपरिक रूप से मुरब्बा, कैंडी, जूस, अचार, च्यवनप्राश और आंवला पाउडर जैसे विभिन्न उत्पाद तैयार किए जाते हैं, जिनमें आंवले का खास खट्टा स्वाद अलग-अलग रूपों में बरकरार रहता है। स्थानीय खेती और खाद्य प्रसंस्करण के बीच यह गहरा संबंध आंवला आधारित उत्पादों को प्रतापगढ़ की खान-पान संस्कृति की एक महत्वपूर्ण पहचान बनाता है।