पीलीभीत उत्तर प्रदेश के रोहिलखंड क्षेत्र में स्थित एक उत्तर-पूर्वी जिला है, जो नेपाल सीमा और हिमालय की शिवालिक पहाड़ियों के निकट स्थित है। यह जिला गोमती नदी के उद्गम स्थल के रूप में प्रसिद्ध है और उत्तर भारत के सबसे घने वन क्षेत्रों में से एक माना जाता है। बाघ संरक्षण के लिए प्रसिद्ध पीलीभीत टाइगर रिजर्व जिले का एक प्रमुख आकर्षण है। पीलीभीत को “बांसुरी नगरी” — सिटी ऑफ फ्लूट्स के नाम से भी जाना जाता है। जिले की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है, जिसमें गन्ना प्रमुख फसल है। यहां कागज, चावल और आटा मिलों के साथ-साथ जरदोजी और मोमबत्ती बनाने जैसे कुटीर उद्योग भी प्रमुख हैं। वन डिस्ट्रिक्ट वन कुज़ीन कार्यक्रम के तहत पीलीभीत जिले के लिए जलेबी, खोया मिठाई, लस्सी और लौज का चयन किया गया है।

पीलीभीत की जलेबी पारंपरिक रूप से देसी घी में तली जाती है। इसमें मैदा की जगह मुख्य रूप से खोये का उपयोग किया जाता है, जिससे इसकी बनावट सघन, मुलायम और रस से भरपूर होती है। बाहर से कुरकुरी और अंदर से बेहद मुलायम व रसीली यह जलेबी स्वाद में गुलाब जामुन से काफी मिलती-जुलती है। इस उद्योग से जुड़ी 100 से अधिक इकाइयों में 300 से अधिक लोग कार्यरत हैं।

पीलीभीत में लस्सी बेहद लोकप्रिय हैं। इनमें स्पेशल दही लस्सी शामिल है, जिसे सामान्य मिक्सर के बजाय पारंपरिक तरीके से दही को मथकर तैयार किया जाता है, जिससे इसकी बनावट गाढ़ी और मलाईदार होती है। खोया या मावा लस्सी में खास तौर पर तैयार किया गया खोया मिलाया जाता है, जो इसके स्वाद को बढ़ाने के साथ इसे और गाढ़ा बनाता है। चीनी और ड्राई फ्रूट लस्सी में स्वाद के अनुसार मिलाई जाती है और ऊपर से कटे हुए सूखे मेवे डालकर परोसा जाता है। इस उद्योग से जुड़ी 80 से अधिक इकाइयों में 250 से अधिक लोग कार्यरत हैं।

पीलीभीत की प्रसिद्ध खोया मिठाई अपनी शुद्धता, मुलायम बनावट और समृद्ध स्वाद के लिए विशेष पहचान रखती है। ताज़े दूध से तैयार किए गए शुद्ध खोये को धीमी आँच पर पकाया जाता है। इसमें चीनी, इलायची तथा आवश्यकतानुसार केसर का संतुलित मिश्रण मिलाकर इसे आकर्षक आकार दिया जाता है और सूखे मेवों से सजाया जाता है, जिससे इसका स्वाद और भी मनमोहक बन जाता है। अपने पारंपरिक स्वाद, प्राकृतिक सुगंध और उत्कृष्ट गुणवत्ता के कारण यह मिठाई त्योहारों, पारिवारिक समारोहों तथा विशेष अवसरों पर लोगों की पहली पसंद रही है। वर्षों से यह पीलीभीत की समृद्ध पाक विरासत और स्थानीय मिठाई संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई है। ODOC कार्यक्रम के अंतर्गत पीलीभीत के स्थानीय हलवाइयों एवं खाद्य उद्यमियों को ब्रांडिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग के माध्यम से सशक्त बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि इस पारंपरिक मिष्ठान को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों में नई पहचान मिल सके। आइए, पीलीभीत की पारंपरिक खोया मिठाई का स्वाद लें और 'लोकल से ग्लोबल' की इस यात्रा में स्थानीय उद्यमियों का साथ दें।

पीलीभीत की स्थानीय मिठाई बनाने की परंपरा में साधारण लौकी को एक समृद्ध और स्वादिष्ट पारंपरिक मिठाई के रूप में तैयार किया जाता है। धीमी आंच पर पकाई गई लौकी से इसकी सघन, नम और हल्की रेशेदार बनावट आती है, जबकि गाढ़े खोये या रबड़ी और शुद्ध देसी घी की मलाईदार समृद्धि इसके स्वाद को संतुलित करती है। त्योहारों और सर्दियों के विशेष अवसरों पर इसे खास तौर पर पसंद किया जाता है। कृषि उपज के रूप में मिलने वाली साधारण लौकी को स्वादिष्ट मिठाई में बदलने की यह पारंपरिक विधि पीलीभीत की खान-पान संस्कृति की खास पहचान को दर्शाती है।