रामगंगा नदी के किनारे स्थित मुरादाबाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश का एक प्रमुख औद्योगिक और निर्यात-उन्मुख जिला है। इसे दुनियाभर में “पीतल नगरी” — ब्रास सिटी के नाम से जाना जाता है। यहां निर्मित पीतल के हस्तशिल्प, एल्युमिनियम की कलाकृतियां, मेटल-इनले उत्पाद और सजावटी वस्तुएं अमेरिका, यूरोप और मध्य पूर्व के देशों में निर्यात की जाती हैं। जिले में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों का व्यापक नेटवर्क है, जो स्थानीय रोजगार का एक प्रमुख स्रोत है। ऐतिहासिक संदर्भों के अनुसार, मुरादाबाद शहर का नाम मुगल सम्राट शाहजहां के पुत्र मुराद बख्श के नाम पर रखा गया था, जिन्होंने 17वीं शताब्दी में इस क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वन डिस्ट्रिक्ट वन कुज़ीन कार्यक्रम के तहत मुरादाबाद जिले के लिए मुरादाबादी दाल का चयन किया गया है।

कहा जाता है कि मुगल राजकुमार मुराद बख्श को राजस्थानी और शाकाहारी भोजन, खासकर दाल, बेहद पसंद थी। उनके रसोइयों ने इसी दाल से नींबू, प्याज, हरी मिर्च, हरा धनिया और कभी-कभी घी मिलाकर एक हल्का, स्वादिष्ट और आसानी से पचने वाला व्यंजन तैयार किया। अपने हल्के और संतुलित स्वाद के कारण यह व्यंजन धीरे-धीरे शाही रसोई से निकलकर आम लोगों के रोजमर्रा के खान-पान का हिस्सा बन गया। मुरादाबाद में यह बेहद लोकप्रिय स्ट्रीट फूड बन चुका है और शादी समारोहों, पार्टियों तथा छोटे-बड़े सांस्कृतिक आयोजनों का भी अभिन्न हिस्सा है। वर्तमान में इस क्षेत्र से 450 से अधिक सूक्ष्म इकाइयां जुड़ी हुई हैं।