मऊ पूर्वी उत्तर प्रदेश का एक प्रमुख औद्योगिक शहर है, जो अपने समृद्ध कपड़ा और पावरलूम उद्योगों के लिए जाना जाता है। यहां निर्मित साड़ियां अपनी शैली में बनारसी साड़ियों से मिलती-जुलती हैं। वन डिस्ट्रिक्ट वन कुज़ीन कार्यक्रम के तहत मऊ जिले के लिए लिट्टी-चोखा और गंठा की भेली का चयन किया गया है।

मऊ की लिट्टी-चोखा मुख्य रूप से मऊ शहर के साथ-साथ घोसी, मधुबन और मोहम्मदाबाद गोहना में भी काफी लोकप्रिय है। सत्तू और मसालों से भरी लिट्टी को तैयार करके इसे बैंगन, आलू और टमाटर से बने स्वादिष्ट चोखे के साथ परोसा जाता है। यह पारंपरिक व्यंजन पूर्वांचल की खान-पान की संस्कृति का एक खास हिस्सा है और स्थानीय लोगों के बीच इसे बड़े चाव से खाया जाता है।

मऊ की गंठा की भेली गन्ने के रस को धीमी आंच पर गाढ़ा करके और उसे गांठदार छोटे-छोटे टुकड़ों का आकार देकर तैयार की जाती है। अपनी प्राकृतिक मिठास और खास सुगंध के लिए प्रसिद्ध यह पारंपरिक गुड़ चाय, पेय पदार्थों और स्थानीय व्यंजनों में उपयोग किया जाता है। मऊ के गन्ना-समृद्ध क्षेत्र से जुड़ी गंठा की भेली पारंपरिक खाद्य निर्माण की सरलता और कौशल को दर्शाती है।

उत्तर प्रदेश के मऊ का गुड़ अपनी शुद्धता और प्राकृतिक स्वाद के लिए खास है। ताज़े गन्ने के रस को पारंपरिक तरीके से धीमी आँच पर पकाकर तैयार किया जाता है, जिससे इसका स्वाद, सुगंध और पोषण सुरक्षित रहता है। यह रसायन-मुक्त है और लड्डू, चिक्की, तिलगुड़ व गजक जैसे स्वादिष्ट उत्पादों में इस्तेमाल होता है। एक जनपद–एक व्यंजन’ (ODOC) के तहत मऊ का गुड़ अब “लोकल से ग्लोबल” की ओर किया जाएगा —किसानों और कारीगरों को नई पहचान और मजबूत बाज़ारो से जोड़ा जाएगा । आइए, मऊ के गुड़ को अपनाएं—स्थानीय स्वाद का समर्थन करें और इस मिठास को दुनिया तक पहुँचाएं!