कुशीनगर एक अंतरराष्ट्रीय बौद्ध तीर्थस्थल है, जहां भगवान बुद्ध ने महापरिनिर्वाण प्राप्त किया था। महापरिनिर्वाण मंदिर और रामाभार स्तूप यहां देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के प्रमुख आकर्षण हैं। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए जिले में एक आधुनिक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भी है। वन डिस्ट्रिक्ट वन कुज़ीन कार्यक्रम के तहत कुशीनगर जिले के लिए बनाना चिप्स, पेड़ा और लाल खोरमा का चयन किया गया है।

कुशीनगर का लाल खोरमा मुख्य रूप से पडरौना, कसया और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में तैयार किया जाता है। मैदा, चीनी और घी से तैयार की जाने वाली यह पारंपरिक मिठाई अपने लाल रंग, कुरकुरी बनावट और लंबे समय तक स्वाद व गुणवत्ता बनाए रखने के लिए जानी जाती है। त्योहारों और पारिवारिक आयोजनों के दौरान इसका खास महत्व रहता है। इस उद्योग से जुड़ी 100 से अधिक इकाइयों में 500 से अधिक लोग कार्यरत हैं।

कुशीनगर का पेड़ा खास तौर पर कसया, पडरौना, तमकुही राज और हाटा में तैयार किया जाता है। शुद्ध दूध और मावे से तैयार की जाने वाली यह मिठाई अपने स्वाद और खास सुगंध के लिए जानी जाती है। बौद्ध तीर्थस्थलों पर आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं के बीच इसकी खास मांग रहती है। इस उद्योग से जुड़ी 100 से अधिक इकाइयों में 800 से अधिक लोग कार्यरत हैं।

कुशीनगर के बनाना चिप्स जिले में केले की समृद्ध खेती की परंपरा से जुड़े हैं। स्थानीय स्तर पर उगाए जाने वाले केलों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने और कटाई के बाद होने वाली बर्बादी को कम करने के लिए कच्चे केलों को पतले टुकड़ों में काटकर तलकर कुरकुरे चिप्स तैयार किए जाने लगे। खेतों से सीधे मिलने वाले ताजे केले, हल्के मसालों और कुरकुरी बनावट के कारण बनाना चिप्स धीरे-धीरे स्थानीय स्तर पर लोकप्रिय हो गए। इस तरह कुशीनगर की कृषि उपज से तैयार बनाना चिप्स जिले की एक खास खान-पान पहचान बन गए हैं।