कभी राजा हर्षवर्धन की गौरवशाली राजधानी रहा कन्नौज आज दुनियाभर में “भारत की इत्र नगरी” के नाम से प्रसिद्ध है। यहां सदियों पुरानी पारंपरिक जल-आसवन विधि से चंदन की लकड़ी और विभिन्न फूलों से प्राकृतिक इत्र तैयार किए जाते हैं। वन डिस्ट्रिक्ट वन कुज़ीन कार्यक्रम के तहत कन्नौज जिले के लिए गट्टा मिठाई और खोया पेड़ा का चयन किया गया है।

कन्नौज की गट्टा मिठाई तिर्वा, छिबरामऊ, गुरसहायगंज और कन्नौज शहर के ग्रामीण बाजारों में खास तौर पर लोकप्रिय है। इसे पारंपरिक रूप से गन्ने के रस और गुड़ से तैयार किया जाता है। सर्दियों के मौसम, स्थानीय मेलों और त्योहारों के दौरान इसे खूब पसंद किया जाता है। इसका पारंपरिक स्वाद और गुड़ की प्राकृतिक मिठास इसे कन्नौज की खान-पान संस्कृति का एक खास हिस्सा बनाते हैं।

कन्नौज का खोया का पेड़ा मकरंद नगर, तिर्वा, गुरसहायगंज और कन्नौज शहर की पुरानी मिठाई की दुकानों में खास तौर पर प्रसिद्ध है। स्थानीय डेयरियों से प्राप्त दूध से तैयार किए गए खोये को धीमी आंच पर पकाया जाता है। इसकी खास सुगंध, मुलायम बनावट और संतुलित मिठास इसे अन्य मिठाइयों से अलग पहचान देती है।