हाथरस उत्तर प्रदेश का एक प्रमुख जिला है, जो अपनी समृद्ध व्यापारिक परंपराओं, कृषि आधारित अर्थव्यवस्था और हींग प्रसंस्करण उद्योग के लिए जाना जाता है। यह जिला भारत में हींग के व्यापार और वितरण के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में जाना जाता है। इसी कारण इसे “हींग नगरी” के नाम से भी जाना जाता है। कृषि और बाजार आधारित व्यापार जिले की अर्थव्यवस्था के प्रमुख आधार हैं। ब्रज संस्कृति से प्रभावित हाथरस का सामाजिक और सांस्कृतिक परिवेश लोकगीतों, पारंपरिक त्योहारों और धार्मिक मान्यताओं से समृद्ध है। स्थानीय उद्यमिता, पारंपरिक व्यापारिक नेटवर्क और छोटे स्तर के उद्योगों ने जिले की आर्थिक गतिविधियों को मजबूत आधार प्रदान किया है। सांस्कृतिक विरासत और व्यापारिक गतिविधियों का यह संतुलित मेल हाथरस को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के महत्वपूर्ण जिलों में एक विशिष्ट स्थान प्रदान करता है। वन डिस्ट्रिक्ट वन कुज़ीन कार्यक्रम के तहत हाथरस जिले के लिए रबड़ी का चयन किया गया है।

हाथरस में रबड़ी बनाने की पारंपरिक कला पीढ़ियों से चली आ रही है। दूध को घंटों तक धीमी आंच पर पकाकर और मलाई की परतों को सावधानीपूर्वक एकत्र करके तैयार की जाने वाली रबड़ी का स्वाद और बनावट गाढ़ी व मलाईदार होती है। बनाने की यह धैर्यपूर्ण प्रक्रिया और पारंपरिक स्वाद रबड़ी को पांच दशकों से अधिक समय से हाथरस की खान-पान विरासत का एक खास हिस्सा बनाए हुए हैं।