आम मान्यताओं के अनुसार, हरदोई ज़िला "हिरण्यकश्यप" से जुड़ा हुआ है। माना जाता है कि हरदोई अपने पुराने नाम "हरिद्रोही" का ही एक बिगड़ा हुआ रूप है। कुछ लोगों के अनुसार, हरदेवबख्श ने इस ज़िले को बसाया था, और इसी वजह से शहर में 'हरदेवगंज' नाम का एक पुराना मोहल्ला भी है। मल्लावां, बिलग्राम, पिहानी, शाहबाद, संडीला और रुइया ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण स्थान हैं। कुछ इतिहासकारों का मानना है कि बौद्धों ने मल्लावां को बसाया था, जबकि अन्य मानते हैं कि यहाँ सैयद सालार मसूद गाज़ी आए थे। मल्लावां पहले ज़िले का मुख्यालय हुआ करता था। बिलग्राम का मूल नाम "श्रीनगर" था, लेकिन महमूद गज़नवी के कुछ साथियों ने इसे इसका वर्तमान नाम दिया। जब मुग़ल बादशाह हुमायूँ शेरशाह सूरी से हार गए थे, तो माना जाता है कि उन्होंने पिहानी के जंगल में शरण ली थी। यह स्थान बादशाह अकबर के मंत्री 'सद्र-ए-जहाँ' से भी जुड़ा हुआ है। उनकी मज़ार और चित्रकलाएँ आज भी यहाँ मौजूद हैं। कुछ लोगों के अनुसार, संडीला को ऋषि सांडिल्य ने बसाया था। संडीला अपनी ऐतिहासिक इमारतों, मस्जिद और 'बारहखंबा' के लिए भी जाना जाता है।

हरदोई के लड्डू मुख्य रूप से हरदोई सदर, शाहाबाद, संडीला और बिलग्राम में खास तौर पर प्रसिद्ध हैं। बेसन, बूंदी और देसी घी से तैयार किए जाने वाले इन लड्डुओं का त्योहारों, धार्मिक आयोजनों और शादी-विवाह के अवसरों पर विशेष रूप से सेवन किया जाता है। इनका स्वाद और गुणवत्ता जिले की स्थानीय पहचान और पारंपरिक खान-पान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इससे जुड़े 100 से अधिक प्रतिष्ठानों में 400 से ज्यादा लोगों को रोजगार भी मिलता है।

हरदोई की आलू-पूरी संडीला, शाहाबाद, हरदोई शहर और पिहानी में लोकप्रिय पारंपरिक नाश्ता है। मसालेदार आलू की सब्जी के साथ परोसी जाने वाली पूरी स्थानीय खान-पान संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। मेलों, बाजारों और सामाजिक आयोजनों के दौरान इसकी मांग खास तौर पर अधिक रहती है। इस उद्योग से जुड़ी 100 से अधिक इकाइयों में 500 से अधिक लोग कार्यरत हैं।

हरदोई की प्रसिद्ध लौज्हड़ मुख्य रूप से कोथावां क्षेत्र में तैयार की जाती है। यह पारंपरिक मिठाई दूध को लंबे समय तक धीमी आंच पर पकाकर तैयार की जाती है। अपनी सघन बनावट, खास स्वाद और सुगंध के लिए जानी जाने वाली लौज्हड़ की मांग त्योहारों, मेलों और स्थानीय बाजारों में खास तौर पर रहती है। इसे हरदोई की विशिष्ट खान-पान पहचान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। इस उद्योग से जुड़ी 50 से अधिक इकाइयों में 100 से अधिक लोग कार्यरत हैं।