गोरखपुर उत्तर प्रदेश के प्रमुख और सबसे बड़े जिलों में से एक है जो गोरखपुर मंडल के अंतर्गत आता है और गोरखपुर शहर जिले का प्रशासनिक मुख्यालय है।

पूर्वांचल की मिट्टी से जुड़ा ऐसा स्वाद, जिसकी सोंधी खुशबू हर किसी को अपनी ओर खींच लेती है। गेहूं के आटे में सत्तू, सरसों तेल, नींबू और पारंपरिक मसालों की भरावन से तैयार लिट्टी को कंडे और धीमी आंच पर भूना जाता है, जिससे इसमें अनोखा और देसी स्वाद आता है। इसके साथ बैंगन, टमाटर और आलू से बना चोखा, कच्चे सरसों तेल और मसालों के तड़के के साथ इस व्यंजन को और भी खास बना देता है। गोरखपुर का यह पारंपरिक व्यंजन सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि अपनी पौष्टिकता और ग्रामीण संस्कृति की पहचान के लिए भी जाना जाता है। ‘एक जनपद–एक व्यंजन’ (ODOC) के तहत इसे नई पहचान दिलाने हेतु प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि स्थानीय स्वाद और संस्कृति को व्यापक मंच मिल सके। अगर कभी गोरखपुर जाएँ, तो यहाँ के प्रसिद्ध लिट्टी-चोखा का स्वाद ज़रूर लें ।

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जनपद की यह सुप्रसिद्ध बर्फी क्षेत्र की समृद्ध पाक-कला और सांस्कृतिक विरासत का उत्कृष्ट प्रतीक है। शुद्ध खोया और पारंपरिक निर्माण विधियों से तैयार यह मिष्ठान अपनी अद्वितीय गुणवत्ता और विशिष्ट स्वाद के लिए विख्यात है। उत्तर प्रदेश सरकार की एक जनपद एक व्यंजन (ODOC) पहल के तहत बरेली की इस खास बर्फी को मिल रहा है नया मंच और नई पहचान। आधुनिक पैकेजिंग और प्रभावी विपणन के माध्यम से इसे राष्ट्रीय ही नहीं, वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। यह पहल न केवल स्थानीय कारीगरों के पुश्तैनी कौशल को संरक्षित कर रही है, बल्कि रोजगार के नए अवसर सृजित कर क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बना रही है।

गोलघर, रेती चौक, अलीनगर और उर्दू बाजार में लहसुन के स्वाद वाले छोले-समोसे खास तौर पर प्रसिद्ध हैं। कुरकुरे समोसों को मसालेदार और लहसुन के स्वाद वाले छोले तथा मसालेदार चटनी के साथ परोसा जाता है। यह गोरखपुर के लोकप्रिय स्ट्रीट फूड में से एक माना जाता है।