गोंडा अवध क्षेत्र का एक प्रमुख जिला है, जो अपने धार्मिक, ऐतिहासिक और कृषि महत्व के लिए जाना जाता है। जिले में स्थित पृथ्वीनाथ मंदिर और इसके आसपास का परसपुर क्षेत्र सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। गोंडा धान, गन्ने और गेहूं के प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में भी शामिल है, जिससे इसकी कृषि आधारित विशिष्ट पहचान बनी हुई है। वन डिस्ट्रिक्ट वन कुज़ीन कार्यक्रम के तहत गोंडा जिले के लिए कचौरी और दही बड़ा का चयन किया गया है।

गोंडा की कचौरी परंपरागत अवधी खान-पान से प्रभावित एक लोकप्रिय व्यंजन है। उड़द की दाल और आलू से तैयार की जाने वाली यह कचौरी अपने मसालेदार स्वाद और कुरकुरी बनावट के लिए खास तौर पर पसंद की जाती है। इसमें इस्तेमाल होने वाली स्थानीय उपज और मसालों की विविधता गोंडा की समृद्ध खान-पान की परंपरा की झलक देती है। इस कचौरी से जुड़े 100 से अधिक प्रतिष्ठानों में 400 से ज्यादा लोगों को रोजगार भी मिलता है।

गोंडा के इटियाथोक के प्रसिद्ध दही बड़े अपने लाजवाब स्वाद, ताज़ी दही और खास मसालों के लिए दूर-दूर तक मशहूर हैं। उड़द दाल से तैयार किए जाने वाले ये नरम और स्वादिष्ट दही बड़े पारंपरिक तरीके से बनाए जाते हैं। इनकी खासियत केवल स्वाद ही नहीं, बल्कि इन्हें परोसने में इस्तेमाल होने वाली गाढ़ी और स्वादिष्ट दही भी है। यहां दही को विशेष तरीके से मिट्टी के बर्तनों में जमाया जाता है, जिससे इसमें प्राकृतिक ठंडक, गाढ़ापन और देसी स्वाद बना रहता है। पारंपरिक मसालों और मिट्टी के बर्तनों में जमी दही का अनोखा मेल इन दही बड़ों को एक अलग पहचान देता है। यही वजह है कि लोग दूर-दूर से इस खास स्वाद का आनंद लेने पहुंचते हैं। एक जनपद एक व्यंजन (ODOC) पहल के अंतर्गत ऐसे पारंपरिक स्थानीय व्यंजनों को बेहतर पहचान, ब्रांडिंग और व्यापक बाजारों तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है, ताकि स्थानीय स्वाद देशभर में अपनी अलग पहचान बना सके।