देवरिया पूर्वी उत्तर प्रदेश का एक महत्वपूर्ण जिला है, जो अपनी उपजाऊ कृषि भूमि और गन्ना, धान तथा गेहूं के उत्पादन के लिए जाना जाता है। जिले का धार्मिक दृष्टि से भी विशेष महत्व है। देवराहा मंदिर और आसपास के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक स्थल इसकी पहचान को और समृद्ध करते हैं। कृषि आधारित अर्थव्यवस्था देवरिया की प्रमुख विशेषताओं में शामिल है। वन डिस्ट्रिक्ट वन कुज़ीन कार्यक्रम के तहत देवरिया जिले के लिए मालपुआ, दही-चूड़ा, गुड़ की जलेबी और लिट्टी-चोखा का चयन किया गया है।

लिट्टी-चोखा देवरिया का एक लोकप्रिय पारंपरिक व्यंजन है। इसमें सत्तू से भरी लिट्टी को धीमी आंच पर सेंका जाता है और बैंगन, आलू तथा टमाटर से तैयार स्वादिष्ट चोखे के साथ परोसा जाता है। इसका पारंपरिक देसी स्वाद पूर्वांचल की खान-पान की समृद्ध संस्कृति को दर्शाता है। देवरिया के स्थानीय लोगों के बीच यह व्यंजन काफी लोकप्रिय है और इसे बड़े चाव से खाया जाता है।

मालपुआ देवरिया की एक पारंपरिक मिठाई है। इसे मैदा, दूध और चीनी के घोल से तैयार करके घी में तला जाता है। इसके बाद इसे चीनी की चाशनी में डुबोया जाता है, जिससे इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है। त्योहारों, मेलों और धार्मिक आयोजनों के दौरान मालपुआ खास तौर पर तैयार किया जाता है और पसंद किया जाता है। इस उद्योग से जुड़ी 50 से अधिक इकाइयों में 150 से अधिक लोग कार्यरत हैं।

देवरिया का दही-चूड़ा जनपद की समृद्ध खाद्य परंपरा और ग्रामीण जीवन शैली का एक विशिष्ट प्रतीक है। पौष्टिकता, सादगी और पारंपरिक स्वाद से भरपूर यह व्यंजन पूर्वांचल की सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा रहा है। चूड़े को ताज़े और गाढ़े दही के साथ मिलाकर तैयार किए जाने वाले इस व्यंजन में स्वादानुसार चीनी, गुड़, केला अथवा मौसमी फलों का भी प्रयोग किया जाता है। इसकी सरल तैयारी, सुपाच्य प्रकृति और पौष्टिक गुण इसे सभी आयु वर्ग के लोगों के बीच लोकप्रिय बनाते हैं। विशेष रूप से मकर संक्रांति जैसे पर्वों और पारिवारिक अवसरों पर इसका विशेष महत्व माना जाता है। एक जनपद–एक व्यंजन (ODOC) पहल के अंतर्गत देवरिया के दही-चूड़ा को व्यापक पहचान प्रदान करने तथा इससे जुड़े स्थानीय उद्यमियों और व्यवसायों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से ब्रांडिंग, आकर्षक पैकेजिंग एवं विपणन को प्रोत्साहित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

गुड़ की जलेबी देवरिया की एक लोकप्रिय पारंपरिक मिठाई है। इसे चीनी की चाशनी के बजाय गुड़ की चाशनी में तैयार किया जाता है, जिससे इसका स्वाद और सुगंध खास हो जाती है। इसका कुरकुरापन और प्राकृतिक मिठास इसे सर्दियों, मेलों और स्थानीय बाजारों में खास तौर पर लोकप्रिय बनाते हैं। इस उद्योग से जुड़ी 100 से अधिक इकाइयों में 500 से अधिक लोग कार्यरत हैं।