चित्रकूट एक अत्यंत पवित्र धार्मिक स्थल है, जहां मान्यता है कि भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण ने अपने वनवास के 11 से अधिक वर्ष बिताए थे। मंदाकिनी नदी के तट पर स्थित यह जिला कामदगिरि पर्वत, रामघाट, जानकी कुंड और स्फटिक शिला जैसे पवित्र स्थलों से समृद्ध है। वन डिस्ट्रिक्ट वन कुज़ीन कार्यक्रम के तहत चित्रकूट जिले के लिए मावा का चयन किया गया है।

चित्रकूट की प्रसिद्ध खोया-आधारित मिठाइयाँ अपनी शुद्धता और लाजवाब स्वाद के लिए खास पहचान रखती हैं। शुद्ध दूध के दानेदार खोए और पारंपरिक कारीगरी की खुशबू से भरपूर ये व्यंजन हर निवाले में बेहतरीन स्वाद का एहसास कराते हैं। चित्रकूट आने वाले श्रद्धालु इन्हें प्रसाद स्वरूप अपने साथ ले जाते हैं, जिससे इन मिठाइयों का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व और बढ़ जाता है। ODOC के अंतर्गत चित्रकूट की इन पारंपरिक मिठाइयों को “लोकल से ग्लोबल” तक पहुँचाने की तैयारी है, ताकि स्थानीय कारीगरों को नई पहचान और बेहतर बाज़ार मिल सके। आइए, चित्रकूट की इस मिठास को अपनाएँ और स्थानीय परंपरा को आगे बढ़ाएँ।