चंदौली को “चावल का कटोरा” के नाम से जाना जाता है। नौगढ़, चंद्रप्रभा वन्यजीव अभयारण्य, राजदरी जलप्रपात और देवदरी जलप्रपात जिले के प्रमुख आकर्षणों में शामिल हैं। काले चावल की खेती, धान का उत्पादन, पहाड़ी वन क्षेत्र और वाराणसी से इसकी व्यावसायिक निकटता जिले की विशिष्ट पहचान हैं। वन डिस्ट्रिक्ट वन कुज़ीन कार्यक्रम के तहत चंदौली जिले के लिए काले चावल, गुलाब जामुन और लस्सी का चयन किया गया है।

मुगलसराय, चंदौली शहर, सकलडीहा और धानापुर में तैयार की जाने वाली लस्सी अपने भरपूर स्वाद और ताजगी के लिए जानी जाती है। ताजे दही से तैयार की जाने वाली इस लस्सी में मलाई, चीनी और सूखे मेवे मिलाकर परोसा जाता है। गर्मियों के मौसम में इसकी मांग खास तौर पर अधिक रहती है।

चंदौली शहर, मुगलसराय—पंडित दीन दयाल उपाध्याय नगर—सकलडीहा और चकिया में तैयार किए जाने वाले गुलाब जामुन अपनी मुलायम बनावट और भरपूर चाशनी के लिए प्रसिद्ध हैं। खोये से तैयार की जाने वाली यह मिठाई विवाह समारोहों, त्योहारों और सामाजिक आयोजनों के दौरान खास तौर पर पसंद की जाती है।

“उत्तर प्रदेश का चावल का कटोरा” कहे जाने वाले चंदौली में वर्ष 2018 से काले चावल की खेती का विस्तार शुरू हुआ, जिससे पोषक तत्वों से भरपूर इस अनाज को क्षेत्र की एक खास पहचान मिली। इसके प्राकृतिक रूप से गहरे रंग वाले दानों से खीर, चावल का आटा, फ्लेक्स, कुकीज़ और अन्य पौष्टिक स्नैक्स तैयार किए जाते हैं। इसका खास रंग, हल्का मेवेदार स्वाद और विभिन्न प्रकार के व्यंजनों में उपयोग होने के कारण चंदौली के काले चावल से बने उत्पादों को लगातार लोकप्रियता मिल रही है।