बुलंदशहर कृषि और दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में एक प्रमुख जिला है और यह विश्व प्रसिद्ध खुर्जा पॉटरी क्लस्टर के लिए भी जाना जाता है। जिले में गंगा नदी के तट पर स्थित नरौरा परमाणु विद्युत स्टेशन उत्तर प्रदेश का एकमात्र परमाणु विद्युत संयंत्र है। वन डिस्ट्रिक्ट वन कुज़ीन कार्यक्रम के तहत बुलंदशहर जिले के लिए कचौरी, खुर्चन और पेड़ा का चयन किया गया है।

बुलंदशहर की प्रसिद्ध कचौरी अपने लाजवाब स्वाद और पारंपरिक निर्माण प्रक्रिया के लिए जानी जाती है। मैदा, दालों और चुनिंदा मसालों से तैयार की जाने वाली यह लोकप्रिय व्यंजन सही अनुपात, बेहतरीन मसाला मिश्रण, उचित तापमान और कारीगरों की कुशलता का परिणाम है। धीमी आंच पर सुनहरी और कुरकुरी होने तक तली गई कचौरी का हर निवाला स्वाद और सुगंध से भरपूर होता है। स्थानीय खाद्य संस्कृति का यह अभिन्न हिस्सा आज भी लोगों की पहली पसंद बना हुआ है। ODOC कार्यक्रम के अंतर्गत स्थानीय हलवाइयों, खाद्य उद्यमियों और मिठाई/नमकीन प्रतिष्ठानों को ब्रांडिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग के माध्यम से सशक्त बनाये जाने कि तय्यारी कि है, जिससे बुलंदशहर की इस लोकप्रिय पहचान को *राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाया जा सके। आइए, बुलंदशहर की कचौरी के स्वाद का आनंद लें और स्थानीय उद्यमियों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में सहभागी बनें।

बुलंदशहर की खुर्चन दूध से तैयार की जाने वाली एक पारंपरिक मिठाई है। इसे धीमी आंच पर दूध को पकाकर तैयार किया जाता है, जिससे मलाई की नाजुक परतें बनती हैं। इन परतों को सावधानी से एकत्र करके मीठा किया जाता है। अपनी मुलायम, मलाईदार बनावट और दूध के भरपूर स्वाद के लिए प्रसिद्ध खुर्चन का खास संबंध खुर्जा से है और इसे बुलंदशहर की विशिष्ट मिठाई माना जाता है। इसकी नाजुक परतें और पारंपरिक बनाने की विधि इसे स्थानीय स्तर पर पसंद की जाने वाली खास मिठाई बनाती हैं।

बुलंदशहर का पेड़ा ताजे मावे या खोये और इलायची के स्वाद के लिए जाना जाता है। इसे पारंपरिक तरीके से कड़ाही में मावा भूनकर तैयार किया जाता है, जिससे इसका रंग हल्का भूरा और बनावट मुंह में घुल जाने वाली हो जाती है। इस उद्योग से जुड़ी 100 से अधिक इकाइयों में 300 से अधिक लोग कार्यरत हैं।