बदायूं की प्रसिद्ध खोया आधारित मिठाइयाँ अपनी शुद्धता और लाजवाब स्वाद के लिए एक खास पहचान रखती हैं। शुद्ध दूध के खोए और पारंपरिक कारीगरी की खुशबू से भरपूर यह व्यंजन हर निवाले में समृद्ध विरासत और संस्कृति का एहसास कराते हैं। 'एक जनपद-एक व्यंजन' (ODOC) कार्यक्रम के माध्यम से अब इस पारंपरिक ज़ायके को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की तैयारी है। ODOC पहल का लक्ष्य इस सदियों पुराने स्वाद को संरक्षित करना और स्थानीय कारीगरों के लिए स्वरोजगार व आर्थिक सशक्तिकरण के नए अवसर पैदा करना है। आइए, शुद्धता के इस प्रतीक को अपनाएं और “लोकल से ग्लोबल” के इस विज़न को मिलकर आगे बढ़ाएं!

बदायूं की लौज उत्तर प्रदेश की पारंपरिक मिठाई है, जिसका संबंध बदायूं की खान-पान परंपरा से जुड़ा हुआ है। इसे मुख्य रूप से लौकी, गाढ़े किए हुए दूध से तैयार खोया या रबड़ी, देसी घी और चीनी से बनाया जाता है। धीमी आंच पर तैयार की जाने वाली इस मिठाई की बनावट सघन, मुलायम और मुंह में घुल जाने वाली होती है। साधारण लौकी को समृद्ध और स्वादिष्ट मिठाई में बदलने की यह पारंपरिक विधि इसे विवाह समारोहों, त्योहारों और विशेष अवसरों पर पसंद की जाने वाली बदायूं की खास मिठाई बनाती है।

बदायूं का पेड़ा उत्तर प्रदेश की एक प्रसिद्ध और पारंपरिक दूध से तैयार होने वाली मिठाई है। यह अपने भरपूर कैरेमल जैसे स्वाद, दानेदार बनावट और खास हल्की धुएँ जैसी सुगंध के लिए जाना जाता है। सामान्य नरम पेड़ों की तुलना में बदायूं के पारंपरिक पेड़े का रंग हल्का भूरा होता है। इसे खोये को चीनी के साथ धीमी आंच पर पकाकर तैयार किया जाता है, जिससे इसका खास स्वाद और बढ़ता है ।