लखनऊ से सटा हुआ बाराबंकी जिला सूफी संत हाजी वारिस अली शाह की दरगाह देवा शरीफ के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध है, जो सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक मानी जाती है। यह जिला बड़े पैमाने पर मेंथा और पुदीने की खेती, हथकरघा बुनाई और अफीम उत्पादन के लिए भी जाना जाता है। वन डिस्ट्रिक्ट वन कुज़ीन कार्यक्रम के तहत बाराबंकी जिले के लिए लाल पेड़ा और चंद्रकला का चयन किया गया है।

लाल पेड़ा नवाबगंज, मसौली, सफदरगंज, रामनगर, फतेहपुर और आसपास के अन्य क्षेत्रों में खास तौर पर लोकप्रिय है। इसे भुने हुए खोये में देसी घी, चीनी और हरी इलायची मिलाकर तैयार किया जाता है। इस उद्योग से जुड़ी 250 से अधिक इकाइयों में 800 से अधिक लोग कार्यरत हैं।

अर्धचंद्राकार आकार, बाहर से हल्की कुरकुरी परत और अंदर से मुलायम, रसीली भरावट—हर कौर में स्वाद का अनोखा अनुभव। मैदा, देसी घी, सूखे मेवे और चाशनी से तैयार यह मिठाई सिर्फ सामग्री का मेल नहीं, बल्कि हलवाई की वर्षों की कारीगरी का नतीजा है। सही तापमान, धीमी-तेज़ आंच का संतुलन और सटीक समय—यही देते हैं चंद्रकला को उसकी परफेक्ट टेक्सचर और कुरकुरापन। ODOC कार्यक्रम के तहत, बेहतर पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग के माध्यम से इस पारंपरिक मिठाई को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँचाने का लक्ष्य है, साथ ही इससे जुड़े कारीगरों और व्यवसायों को भी कार्यक्रम कि योजनाओ के माध्यम से सशक्त किया जायेगा । एक बार जरूर चखें—चंद्रकला का स्वाद, जो दिल में बस जाए!