बलिया शहर, महर्षि भृगु की जन्मभूमि और कार्यस्थल के लिए माना जाता है। बलिया में बोली जाने वाली भाषा हिंदी और भोजपुरी है | बलिया शहर इस जिले का जिला मुख्यालय और वाणिज्यिक बाजार है | और रसरा दूसरा प्रमुख वाणिज्यिक शहर है।

बलिया का पारंपरिक सत्तू अपने खास स्वाद, पौष्टिकता और देसी पहचान के लिए लगातार लोकप्रिय होता जा रहा है। अब बलिया के सत्तू से बने उत्पाद देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ वैश्विक बाजारों तक भी अपनी पहुंच बना रहे हैं। पारंपरिक उत्पादों को नई पहचान दिलाने और इनके बाजार को और अधिक विस्तार देने हेतु ODOC कार्यक्रम के माध्यम से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। स्थानीय स्वाद को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में बलिया का सत्तू एक मजबूत उदाहरण बनकर उभर रहा है।

बलिया का सुप्रसिद्ध सत्तू अपने बेमिसाल स्वाद और उच्च पौष्टिकता के लिए एक खास पहचान रखता है। पारंपरिक विधि से भुने हुए चने से तैयार यह सत्तू अपने प्राकृतिक गुणों के साथ हर निवाले में पूर्वांचल की समृद्ध विरासत और खान-पान संस्कृति का एहसास कराता है। ‘एक जनपद–एक व्यंजन’ (ODOC) कार्यक्रम के माध्यम से अब इस पारंपरिक स्वाद को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए बाज़ारों से जोड़ने की तैयारी की जा रही है। ODOC पहल का उद्देश्य इस पारंपरिक और स्वास्थ्यवर्धक खाद्य उत्पाद का संरक्षण करते हुए स्थानीय किसानों, कारीगरों और विक्रेताओं के लिए स्वरोज़गार तथा आर्थिक सशक्तिकरण के नए अवसर सृजित करना है।