यमुना नदी के किनारे स्थित बागपत का संबंध महाभारत काल से जुड़ा हुआ माना जाता है। यह जिला उन्नत गन्ने की खेती के लिए जाना जाता है। यहां की मिट्टी कुश्ती और दंगल की परंपराओं के लिए भी प्रसिद्ध है, जिसने देश को कई अंतरराष्ट्रीय स्तर के पहलवान और सैनिक दिए हैं। वन डिस्ट्रिक्ट वन कुज़ीन कार्यक्रम के तहत बागपत जिले के लिए बालूशाही और घेवर का चयन किया गया है।

बागपत का प्रसिद्ध घेवर अपनी जालीदार बनावट, समृद्ध स्वाद और पारंपरिक निर्माण कला के लिए जाना जाता है। मैदा, घी, चीनी और दूध से तैयार होने वाला यह विशेष मिष्ठान सही घोल, उचित तापमान और हलवाई की अद्भुत कारीगरी का परिणाम है। गर्म घी में विशेष तकनीक से घोल को परत-दर-परत डालकर इसकी विशिष्ट जालीदार संरचना बनाई जाती है। फिर इसे चाशनी में डुबोकर और सूखे मेवों से सजाकर एक स्वादिष्ट मिठाई का रूप दिया जाता है। ODOC कार्यक्रम के माध्यम से बागपत के स्थानीय हलवाइयों और मिठाई व्यवसायों को ब्रांडिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग का सहयोग प्रदान किये जाने के प्रयास किए जा रहा है, जिससे इस पारंपरिक मिठाई को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक नई पहचान मिल सके। आइए, बागपत के घेवर की अनूठी मिठास का स्वाद लें और स्थानीय उद्यमियों को सशक्त बनाने में सहभागी बनें।

मैदा, घी और चीनी की चाशनी से तैयार की जाने वाली कुरकुरी और स्वादिष्ट बालूशाही बागपत में बेहद लोकप्रिय है, खासकर अकबरपुर, टांडा और जलालपुर में। इस उद्योग से जुड़ी 100 से अधिक इकाइयों में 600 से अधिक लोग कार्यरत हैं।