काफ़ी वर्षों से, औरैया ज़िले का आसपास के क्षेत्र जैसे- फर्रुखाबाद, मैनपुरी, आगरा, ग्वालियर और कानपुर के साथ बड़े पैमाने पर व्यापार होता रहा है। इनमें मुख्य रूप से कपास, घी, तिलहन की बिक्री होती थी और धातु, चावल, नमक और चीनी खरीदा जाता था। ग्वालियर के आस-पास के इलाकों से घी और गेहूं भी बिक्री के लिए ज़िले के रेलवे स्टेशनों पर भेज दिया जाता था। घी और खाद्यान्न व्यापार की मुख्य वस्तुएं हैं। घी को पंजाब, बंगाल, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और बॉम्बे तक भेजा जाता है। भारतीय आहार में घी का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। आहार में उपयोग के अलावा, घी, धार्मिक अनुष्ठान में भी इस्तेमाल होता है।

औरैया की बालूशाही औरैया सदर, बिधूना, दिबियापुर और अजीतमल में खास तौर पर लोकप्रिय है। मैदा, घी और चीनी की चाशनी से तैयार की जाने वाली यह पारंपरिक मिठाई बाहर से कुरकुरी और स्वाद में हल्की मीठी होती है। स्थानीय मिठाई की दुकानों पर पूरे साल इसकी मांग बनी रहती है। इससे जुड़े 50 से अधिक प्रतिष्ठानों में 200 से ज्यादा लोगों को रोजगार भी मिलता है।

औरैया का गुड़ अपनी शुद्धता, प्राकृतिक मिठास और बेहतरीन गुणवत्ता के लिए जाना जाता है। ताज़े गन्ने के रस को पारंपरिक तरीके से धीमी आँच पर लंबे समय तक पकाकर तैयार किया जाता है, जिससे इसमें मौजूद प्राकृतिक स्वाद और पोषक तत्व पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं। यह पूरी तरह रसायन-मुक्त होता है और लड्डू, चिक्की, तिलगुड़ व गजक जैसे स्वादिष्ट उत्पादों में इस्तेमाल किया जाता है। एक जनपद एक व्यंजन (ODOC) के अंतर्गत औरैया के गुड़ और गुड़ उत्पादों को “लोकल से ग्लोबल” तक पहुँचाने की तैयारी की जा रही है, ताकि स्थानीय कारीगरों को नई पहचान और बेहतर बाज़ार मिल सके। आइए, औरैया के गुड़ और गुड़ उत्पादों को अपनाएं—इस देसी स्वाद को एक नई पहचान दिलाएं!

औरैया का शुद्ध देसी घी जिले की लंबे समय से चली आ रही ग्रामीण डेयरी परंपरा से जुड़ा है, जहां स्थानीय ताजे दूध को पीढ़ियों से पारंपरिक तरीके से तैयार किया जाता रहा है। पारंपरिक विधि से मथकर और धीमी आंच पर गर्म करके तैयार किया जाने वाला यह घी सुनहरे रंग, प्राकृतिक सुगंध और गहरे स्वाद से भरपूर होता है। इसकी शुद्धता और पारंपरिक बनाने की विधि ने शुद्ध देसी घी को औरैया की पाक एवं कृषि विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है।

औरैया की दूध की बर्फी मुख्य रूप से औरैया शहर, दिबियापुर, बिधूना और अजीतमल में तैयार की जाती है। ताजे दूध और मावा से बनाई जाने वाली यह मिठाई अपने भरपूर स्वाद और मुलायम बनावट के लिए प्रसिद्ध है। त्योहारों, विवाह समारोहों और धार्मिक आयोजनों के दौरान इसकी खास मांग रहती है। इस उद्योग से जुड़ी 100 से अधिक इकाइयों में 500 से अधिक लोग कार्यरत हैं।