अमरोहा उत्तर प्रदेश का एक ऐतिहासिक शहर है, जो रामगंगा नदी के निकट स्थित है। यह अपने ढोलक, आम और सुगंधित इत्र या अत्तर के लिए प्रसिद्ध है। शहर की पहचान सूफी परंपराओं और उत्कृष्ट कारीगरी से भी जुड़ी हुई है। लकड़ी की नक्काशी और ढोलक बनाने की कला यहां पीढ़ियों से संरक्षित है। अमरोहा के पुराने बाजार, संकरी गलियां और मसालों व सूखे मेवों की दुकानों से आती खुशबू इसकी पहचान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ईद, होली और अन्य त्योहारों के दौरान यहां की गंगा-जमुनी संस्कृति विशेष रूप से देखने को मिलती है। आसपास की रेलवे और राजमार्ग कनेक्टिविटी अमरोहा को दिल्ली–मुरादाबाद कॉरिडोर से जोड़ती है। एक जनपद एक व्यंजन कार्यक्रम के तहत अमरोहा जिले के लिए आम पन्ना, आम की चटनी, सेव और लड्डू का चयन किया गया है।

अमरोहा में बेसन के लड्डू, बूंदी के लड्डू और मोतीचूर के लड्डू खास तौर पर लोकप्रिय हैं। इन्हें बेसन, बूंदी, गुड़ या चीनी, सूखे मेवों और इलायची से तैयार किया जाता है। देसी घी की पारंपरिक मिठास और शुद्धता अमरोहा के लड्डुओं को एक अलग और यादगार पहचान देते हैं।

अमरोहा का नाम ही आम से जुड़ा हुआ है। माना जाता है कि ‘अमरोहा’ नाम ‘आमरोहा’ से निकला है, जो प्राचीन समय से ही इस क्षेत्र में मौजूद आम के बागों को दर्शाता है। अमरोहा बड़े पैमाने पर आम के उत्पादन और निर्यात के लिए प्रसिद्ध है। यहां के आम विदेशी बाजारों में भी निर्यात किए जाते हैं, जिससे अमरोहा की पहचान ऐतिहासिक रूप से आमों के शहर के रूप में बनी है। गंगा-यमुना क्षेत्र की उपजाऊ दोमट मिट्टी और अनुकूल जलवायु आम की खेती के लिए बेहद उपयुक्त है। आम से जुड़ी इकाइयां और बाग मुख्य रूप से गजरौला, हसनपुर, धनौरा और जोया जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में फैले हुए हैं, जिससे 9,000 से अधिक लोगों को रोजगार मिलता है।

अमरोहा की आम की चटनी जिले की उपजाऊ दोमट मिट्टी और अनुकूल जलवायु में उगाई जाने वाली विशेष आम की किस्मों से तैयार की जाती है। कच्चे आम, पुदीना, धनिया, हरी मिर्च और पारंपरिक मसालों के संतुलित मिश्रण से बनाई जाने वाली यह चटनी अपने मीठे, खट्टे और तीखे स्वाद के लिए जानी जाती है। गजरौला, हसनपुर, धनौरा और जोया जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में इसे कुटीर उद्योग के रूप में बड़े पैमाने पर तैयार किया जाता है। यह चटनी स्थानीय भोजन के स्वाद को और बढ़ाती है और अमरोहा की खान-पान की विशिष्ट पहचान का एक हिस्सा है।

अमरोहा की सेव को जोया के पारंपरिक नमकीन निर्माताओं के कारण खास पहचान मिली, जहां इसके खास मसाला मिश्रण की परंपरा दशकों से चली आ रही है। बेसन के आटे में संतुलित मात्रा में मसाले मिलाकर उसे बारीक सेव के रूप में तैयार किया जाता है और फिर कुरकुरी व सुनहरी होने तक तला जाता है। अपने चटपटे स्वाद, हल्के कुरकुरेपन और लंबे समय तक ताजगी बनाए रखने के कारण सेव अमरोहा की एक प्रसिद्ध पारंपरिक नमकीन है।