वर्ष 1995 में स्थापित अंबेडकर नगर जिला विशेष रूप से टांडा स्थित अपने हथकरघा और पावरलूम वस्त्र उद्योग के लिए जाना जाता है। यहां निर्मित कपड़े की आपूर्ति उत्तर भारत के विभिन्न क्षेत्रों में की जाती है। सरयू नदी के किनारे स्थित इस जिले का रामायण काल से जुड़े श्रवण क्षेत्र से भी ऐतिहासिक संबंध माना जाता है। वन डिस्ट्रिक्ट वन कुज़ीन कार्यक्रम के तहत अंबेडकर नगर जिले के लिए बालूशाही, चाट, खजला और लाल गन्ने की गोटी का चयन किया गया है।

मैदा, घी और चीनी की चाशनी से तैयार की जाने वाली कुरकुरी और स्वादिष्ट बालूशाही अंबेडकर नगर में बेहद लोकप्रिय है, खासकर अकबरपुर, टांडा और जलालपुर में। इस उद्योग से जुड़ी 100 से अधिक इकाइयों में 600 से अधिक लोग कार्यरत हैं।

अंबेडकर नगर की चाट आलू टिक्की, दही, मसालों और चटनी से तैयार की जाती है। यह अकबरपुर, टांडा और जलालपुर में खास तौर पर लोकप्रिय है। अपने खास स्थानीय स्वाद के कारण यह जिले की विशिष्ट पहचान का हिस्सा है। इस उद्योग से जुड़ी 200 से अधिक इकाइयों में 1,000 से अधिक लोग कार्यरत हैं।

अंबेडकर नगर का खजला मैदा, घी और चीनी से तैयार की जाने वाली पारंपरिक मिठाई है। इसे खास तौर पर टांडा, अकबरपुर और इल्तिफ़ातगंज में तैयार किया जाता है और त्योहारों के दौरान इसकी विशेष मांग रहती है। इसके उत्पादन और वितरण से लगभग 40–60 इकाइयाँ जुड़ी हुई हैं।

स्थानीय स्तर पर उगाई जाने वाली लाल गन्ने की गोटी टांडा, अकबरपुर, भीटी और कटेहरी में मुख्य रूप से बोई जाती है। यह अपनी मिठास और रसीलेपन के लिए जानी जाती है। जिले के लगभग 1,500–2,000 किसान परिवार इसकी खेती से जुड़े हुए हैं और स्थानीय बाजारों में इसकी अच्छी मांग बनी रहती है।